कार लोन कैलकुलेटर

कीमत, डाउन पेमेंट, ट्रेड-इन, टैक्स और फ़ीस से वाहन की पूरी डील तैयार करें, फिर मासिक किस्त, कुल ब्याज, फ़ॉर्मूला और भुगतान शेड्यूल देखें।

वाहन की डील

वाहन की डील

टैक्स और फ़ीस

टैक्स योग्य राशि

लोन की शर्तें

लोन राशि कैसे बनती है

वाहन की कीमत
बिक्री टैक्स
फ़ीस
कैश रीबेट
डाउन पेमेंट
नेट ट्रेड-इन इक्विटी
लोन राशि

फ़ॉर्मूला और संख्यात्मक मान

मासिक किस्त का फ़ॉर्मूलाM = P × r × (1 + r)n ÷ ((1 + r)n − 1)
M = मासिक किस्तP = लोन राशिr = मासिक दर (सालाना दर ÷ 12 ÷ 100)n = मासिक किस्तों की संख्या
बिक्री टैक्स का संख्यात्मक मान
लोन राशि का संख्यात्मक मान
किस्त का संख्यात्मक मान

लोन अवधियों की तुलना करें

अवधिमासिक किस्तकुल ब्याज
36 महीनेवर्तमान
48 महीनेवर्तमान
60 महीनेवर्तमान
72 महीनेवर्तमान
84 महीनेवर्तमान
मासिक अमोर्टाइजेशन शेड्यूल
महीनाकिस्तमूलधनब्याजबकाया राशि
मासिक किस्त का अनुमान लगाने के लिए वाहन की डील और लोन की शर्तें डालें।

हर गणना आपके ब्राउज़र में चलती है। आपके द्वारा डाली गई कीमतें और लोन के आँकड़े आपके डिवाइस पर ही रहते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

लोन राशि की गणना कैसे की जाती है?

यह वाहन की कीमत से शुरू होता है, जिसमें से कैश रीबेट, डाउन पेमेंट और नेट ट्रेड-इन इक्विटी को घटाया जाता है, और फिर आपके द्वारा फाइनेंस के लिए चुने गए बिक्री टैक्स और फ़ीस को जोड़ा जाता है। अगर ट्रेड-इन वाहन पर उसकी कीमत से ज़्यादा बकाया है, तो वह कमी नए लोन को घटाने के बजाय बढ़ा देती है।

ट्रेड-इन टैक्स सेटिंग कैसे काम करती है?

जब यह विकल्प चालू होता है, तो बिक्री टैक्स की गणना वाहन की कीमत में से ट्रेड-इन वैल्यू घटाने के बाद की जाती है, जो कभी भी शून्य से नीचे नहीं होती। जब यह बंद होता है, तो वाहन की पूरी कीमत पर टैक्स लगता है। स्थानीय नियम अलग-अलग होते हैं, और यह माना जाता है कि कैश रीबेट से टैक्स योग्य राशि कम नहीं होती है, इसलिए अपने लिखित कोटेशन पर टैक्स के आधार की जाँच करें।

क्या यहाँ दी गई सालाना दर लेंडर के APR के समान ही है?

ज़रूरी नहीं है। यह कैलकुलेटर आपके द्वारा डाली गई सालाना प्रतिशत दर को एक शुद्ध फिक्स्ड दर मानकर उसे बारह मासिक अवधियों में विभाजित करता है। घोषित किए गए APR में अनिवार्य क्रेडिट फ़ीस भी शामिल हो सकती है, इसलिए अंतिम अनुबंध का मिलान करने के लिए लेंडर की लोन राशि, फाइनेंस चार्ज और कुल भुगतानों का उपयोग करें।

लेंडर की मासिक किस्त अलग क्यों हो सकती है?

अनुबंध में टैक्स योग्य राशि, फाइनेंस की गई फ़ीस, भुगतान की तारीख, दैनिक-ब्याज का नियम या राउंडिंग का तरीका अलग हो सकता है। वैकल्पिक ऐड-ऑन और ट्रेड-इन के बकाया भुगतान में बदलाव भी लोन ली गई राशि को प्रभावित करते हैं। डील के ढाँचे की तुलना करने के लिए इस अनुमान का उपयोग करें, फिर हस्ताक्षर किए जाने वाले दस्तावेज़ से हर एक लाइन का मिलान कर लें।

वाहन की खरीद के समय वित्तीय संरचना को समझना और मासिक भुगतान का सटीक अनुमान लगाना एक महत्वपूर्ण कदम है। कार लोन कैलकुलेटर एक मुफ्त ऑनलाइन टूल है जो वाहन की कीमत, डाउन पेमेंट, ट्रेड-इन वैल्यू, बिक्री टैक्स, फ़ीस और लोन की अवधि जैसे विवरणों का उपयोग करके मासिक किस्त और कुल ब्याज लागत का विश्लेषण करता है। यह टूल खरीदारों को विभिन्न लोन अवधियों की तुलना करने और भुगतान के गणितीय आधार को समझने में मदद करता है।

कार लोन की राशि का निर्धारण

एक नए वाहन के लिए ली जाने वाली लोन राशि केवल कार की शोरूम कीमत पर निर्भर नहीं होती। इसमें कई वित्तीय घटक शामिल होते हैं जो कुल ऋण राशि को बढ़ाते या घटाते हैं:

  • वाहन की कीमत: यह वाहन का मूल मूल्य है, जो 0 से अधिक होना चाहिए।
  • कैश रीबेट: निर्माता या डीलर द्वारा दी जाने वाली छूट जो सीधे वाहन की कीमत को कम करती है। यह राशि ऋणात्मक नहीं हो सकती।
  • डाउन पेमेंट: साइनिंग के समय नकद भुगतान की जाने वाली राशि, जो लोन की आवश्यकता को कम करती है। यह ऋणात्मक नहीं हो सकती।
  • नेट ट्रेड-इन इक्विटी: आपके पुराने वाहन की ट्रेड-इन वैल्यू और उस पर बकाया राशि का अंतर। यदि बकाया राशि ट्रेड-इन वैल्यू से अधिक है, तो उत्पन्न होने वाली कमी नए लोन की राशि में जोड़ दी जाती है।

यदि उपयोगकर्ता द्वारा दर्ज की गई रीबेट, डाउन पेमेंट और ट्रेड-इन वैल्यू मिलकर वाहन की पूरी कीमत को कवर कर लेते हैं, तो टूल त्रुटि संदेश "रीबेट, डाउन पेमेंट और ट्रेड-इन से वाहन की पूरी कीमत चुक जाती है। लोन की गणना करने के लिए इन्हें कम करें।" प्रदर्शित करता है।

टैक्स और फ़ीस का प्रभाव

वाहन की खरीद पर लगने वाले बिक्री टैक्स और डीलर फ़ीस को संभालने के दो तरीके हैं। उपयोगकर्ता यह चुन सकता है कि वह इन खर्चों का भुगतान साइनिंग के समय नकद करेगा या इन्हें लोन राशि में शामिल करेगा:

  1. बिक्री टैक्स और फ़ीस को फाइनेंस करें: इस विकल्प को सक्षम करने पर, बिक्री टैक्स और डीलर, टाइटल व रजिस्ट्रेशन फ़ीस को लोन राशि में जोड़ दिया जाता है, जिससे मासिक किस्त बढ़ जाती है लेकिन साइनिंग के समय देय कैश कम हो जाता है।
  2. टैक्स योग्य आधार को ट्रेड-इन वैल्यू से कम करें: स्थानीय नियमों के आधार पर, यदि यह विकल्प चालू है, तो बिक्री टैक्स की गणना वाहन की कीमत में से ट्रेड-इन वैल्यू को घटाकर की जाती है। यह टैक्स योग्य आधार कभी भी शून्य से नीचे नहीं जा सकता। यदि यह विकल्प बंद है, तो टैक्स की गणना वाहन की पूरी कीमत पर की जाती है। कैश रीबेट से टैक्स योग्य आधार कम नहीं होता है।

मासिक किस्त की गणना का गणितीय फ़ॉर्मूला

मासिक किस्त की गणना के लिए टूल एक निश्चित गणितीय फ़ॉर्मूले का उपयोग करता है। गणना में यह माना जाता है कि सालाना ब्याज दर फिक्स्ड है, मासिक किस्तें बराबर हैं, कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं किया गया है, और कोई लेट फ़ीस या वैरिएबल-रेट बदलाव शामिल नहीं है।

सालाना ब्याज दर को बारह मासिक अवधियों में विभाजित करके मासिक दर प्राप्त की जाती है: r = सालाना दर ÷ 12 ÷ 100

मासिक किस्त की गणना का फ़ॉर्मूला इस प्रकार है:

M = P × (r × (1 + r)ⁿ) ÷ ((1 + r)ⁿ - 1)

जहाँ:

  • M = मासिक किस्त
  • P = लोन राशि
  • r = मासिक दर
  • n = मासिक किस्तों की संख्या

इंटरफेस के "फ़ॉर्मूला और संख्यात्मक मान" अनुभाग में उपयोगकर्ता निम्नलिखित विवरण देख सकते हैं:

  • मासिक किस्त का फ़ॉर्मूला
  • बिक्री टैक्स का संख्यात्मक मान
  • लोन राशि का संख्यात्मक मान
  • किस्त का संख्यात्मक मान

लोन अवधियों की तुलना और अमोर्टाइजेशन

लोन की अवधि (1 से 120 महीने) मासिक किस्त और कुल ब्याज दोनों को प्रभावित करती है। कम अवधि के लोन में मासिक किस्त अधिक होती है, लेकिन कुल ब्याज लागत कम होती है। इसके विपरीत, लंबी अवधि के लोन में मासिक किस्त कम होती है, लेकिन समय के साथ कुल ब्याज भुगतान बढ़ जाता है।

टूल "लोन अवधियों की तुलना करें" अनुभाग प्रदान करता है, जहाँ वर्तमान चुनी गई अवधि के साथ अन्य अवधियों के लिए मासिक किस्त और कुल ब्याज की तुलना की जाती है।

इसके अतिरिक्त, "मासिक अमोर्टाइजेशन शेड्यूल" प्रत्येक महीने के लिए निम्नलिखित विवरणों को तालिका के रूप में दर्शाता है:

  • किस्त
  • मूलधन
  • ब्याज
  • बकाया राशि

डेटा प्रोसेसिंग और गोपनीयता

इस कैलकुलेटर में सुरक्षा और गोपनीयता का विशेष ध्यान रखा गया है। हर गणना पूरी तरह से उपयोगकर्ता के ब्राउज़र में स्थानीय रूप से चलती है। आपके द्वारा दर्ज की गई कीमतें, ब्याज दरें और लोन के आँकड़े आपके डिवाइस पर ही रहते हैं और किसी बाहरी सर्वर पर प्रेषित नहीं किए जाते हैं।

सामान्य त्रुटियाँ और इनपुट नियम

सटीक गणना सुनिश्चित करने के लिए, टूल निम्नलिखित नियमों और त्रुटि संदेशों का उपयोग करता है:

  • यदि आवश्यक फ़ील्ड खाली छोड़ दिए जाते हैं: "वाहन की कीमत, सालाना दर और महीनों में लोन की पूरी अवधि डालें।"
  • यदि वाहन की कीमत 0 या उससे कम दर्ज की जाती है: "0 से ज़्यादा की वाहन कीमत डालें।"
  • यदि कोई भी इनपुट मान ऋणात्मक दर्ज किया जाता है: "रीबेट, भुगतान, ट्रेड-इन की राशि, टैक्स, फ़ीस और ब्याज 0 से कम नहीं हो सकते।"
  • यदि लोन की अवधि 1 से कम या 120 से अधिक है, या पूर्णांक नहीं है: "1 से 120 तक महीनों की एक पूर्ण संख्या डालें।"
  • यदि दर्ज किए गए आँकड़े गणना की सीमा से बाहर हैं: "इन आँकड़ों की गणना करना संभव नहीं है, ये बहुत बड़े हैं।"

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

लेंडर की मासिक किस्त अलग क्यों हो सकती है? अनुबंध में टैक्स योग्य राशि, फाइनेंस की गई फ़ीस, भुगतान की तारीख, दैनिक-ब्याज का नियम या राउंडिंग का तरीका अलग हो सकता है। वैकल्पिक ऐड-ऑन और ट्रेड-इन के बकाया भुगतान में बदलाव भी लोन ली गई राशि को प्रभावित करते हैं। डील के ढाँचे की तुलना करने के लिए इस अनुमान का उपयोग करें, फिर हस्ताक्षर किए जाने वाले दस्तावेज़ से हर एक लाइन का मिलान कर लें।

लोन राशि की गणना कैसे की जाती है? यह वाहन की कीमत से शुरू होता है, जिसमें से कैश रीबेट, डाउन पेमेंट और नेट ट्रेड-इन इक्विटी को घटाया जाता है, और फिर आपके द्वारा फाइनेंस के लिए चुने गए बिक्री टैक्स और फ़ीस को जोड़ा जाता है। अगर ट्रेड-इन वाहन पर उसकी कीमत से ज़्यादा बकाया है, तो वह कमी नए लोन को घटाने के बजाय बढ़ा देती है।

क्या यहाँ दी गई सालाना दर लेंडर के APR के समान ही है? ज़रूरी नहीं है। यह कैलकुलेटर आपके द्वारा डाली गई सालाना प्रतिशत दर को एक शुद्ध फिक्स्ड दर मानकर उसे बारह मासिक अवधियों में विभाजित करता है। घोषित किए गए APR में अनिवार्य क्रेडिट फ़ीस भी शामिल हो सकती है, इसलिए अंतिम अनुबंध का मिलान करने के लिए लेंडर की लोन राशि, फाइनेंस चार्ज और कुल भुगतानों का उपयोग करें।

ट्रेड-इन टैक्स सेटिंग कैसे काम करती है? जब यह विकल्प चालू होता है, तो बिक्री टैक्स की गणना वाहन की कीमत में से ट्रेड-इन वैल्यू घटाने के बाद की जाती है, जो कभी भी शून्य से नीचे नहीं होती। जब यह बंद होता है, तो वाहन की पूरी कीमत पर टैक्स लगता है। स्थानीय नियम अलग-अलग होते हैं, और यह माना जाता है कि कैश रीबेट से टैक्स योग्य राशि कम नहीं होती है, इसलिए अपने लिखित कोटेशन पर टैक्स के आधार की जाँच करें।